बस्ती जनपद में ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्टों को लेकर मरीजों ने लगाया गंभीर आरोप
- जिम्मेदारी से बचने हेतु बिना हस्ताक्षर व मुहर की अप्रमाणित रिपोर्ट मरीजो को दे रहा ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर
- अप्रमाणित रिपोर्ट सौंपे जाने से स्वास्थ्य विभाग की साख को लग रहा बट्टा , उठ रहे तरह - तरह के प्रश्न
- मरीजों के साथ मीडिया टीम को भी गुमराह करने के प्रयास में जुटा ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर , कर रहा लीपापोती
बस्ती - अप्रमाणित रिपोर्टों को लेकर जनपद में चर्चित ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर मरीजों को गुमराह करने के साथ - साथ मीडिया टीम को भी गुमराह करने के प्रयास में जुटा हुआ है जिसको लेकर जिले में तरह - तरह की चर्चाएं चल रही हैं साथ ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है ।
आप को बता दें कि जनपद मुख्यालय पर जिला अस्पताल के सामने गेट नंम्बर एक के दक्षिण कैली अस्पताल रोड पर ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर स्थित है जहां पर अल्ट्रासांउड , एक्स रे , सीटी स्कैन, ईसीजी , सभी रोगों की जांच हेतु पैथालॉजी समेत अन्य तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं । जिला अस्पताल बस्ती के बगल होने के कारण मरीजों की संख्या हमेशा ज्यादा बनी रहती है । मरीजों की संख्या ज्यादा देखकर लोगों को विश्वास हो जाता है कि डायग्नोस्टिक सेंटर पर प्रशिक्षित डाक्टरों द्वारा जाँचे विश्वशनीय तरीके से की जाती हैं परन्तु सत्यता से अंजान मरीजों के साथ क्या छल हो रहा है जिसको जानकर आपके पैरोतले जमीन खिसक जायेगी । मरीज ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर पर आते हैं और घंटो - घंटो तक अपनी बारी का इन्तजार भी करते हैं मरीजों के इस विश्वास पर कुठाराघात करते हुए भविष्य की जिम्मेदारियों से बचने के लिए सेंटर द्वारा मरीजों को बिना हस्ताक्षर व बिना मुहर लगी अप्रमाणित रिपोर्ट सौंपी जा रही है जिसको लेकर जनपद में चर्चाओं का दौर जारी है ।
जनहित को लेकर मीडिया टीम की सतही पड़ताल में घटना सत्य भी पायी गयी और पता चला कि डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा प्रदान की जा रही रिपोर्टों पर वास्तव में हस्ताक्षर व मुहर नहीं हो रहे हैं । अब बड़ा सवाल यह है आखिर क्यों ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा रिपोर्टों पर हस्ताक्षर नही किया जा रहा है और न ही मुहर लगाया जा रहा है ? कैसे पता चलेगा कि किस डाक्टर ने रिपोर्ट तैयार किया है और भविष्य में जिम्मेदारी किसकी व कैसे तय होगी ?
स्वास्थ विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों से जानकारी ली गई कि बिना किसी प्रशिक्षित डाक्टर के हस्ताक्षर व मुहर के रिपोर्ट मरीजों को देना कहाँ तक न्यायसंगत होगा तो जिम्मेदारों ने इसे दोषपूर्ण मानते हुए कार्यवाही की बात करते हुए मामले को टाल दिया । फिरहाल मामला संज्ञान में आने के बाद सेंटर द्वारा लीपापोती जारी हो गयी है अब देखना यह है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० राजीव निगम द्वारा उक्त प्रकरण में क्या कार्यवाही की जाती है ।


Post a Comment
0 Comments